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सोमवार, 22 सितंबर 2014

उत्तराखंड की नौकरशाही का भगवान ही मालिक : किशोर उपाध्याय

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने कहा, अमित शाह नहीं संभाल सकते पूरा देश
कहा, गुजरात के तड़ीपार हैं अमित शाह गैरसैंण में राज्य की राजधानी बनाने का किया समर्थन, राज्य सरकार से वहां पार्टी कार्यालय के लिए जमीन भी मांगी
नैनीताल (एसएनबी)। अपनी ताजपोशी के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय का पहली बार सरोवरनगरी आगमन अनेक विवादों को जन्म दे सकता है। यहां उन्होंने जहां कई विवादास्पद टिप्पणियां कीं। वहीं उनके स्वागत में जिस तरह बाहर से आये कार्यकर्ताओं ने अपने नाम के होर्डिग लेकर मुंह दिखाई का प्रदर्शन किया, वह भी अभूतपूर्व रहा। 
नैनीताल क्लब में पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक के उपरांत मीडियाकर्मियों से बातचीत में उपाध्याय ने पहली टिप्पणी प्रदेश की नौकरशाही को लेकर की। उन्होंने कहा कि प्रदेश की नौकरशाही का भगवान ही मालिक है। राज्य इन अधिक पढ़-लिखकर आ गए लोगों के लिए नहीं बना है। उन्होंने प्रदेश के सीएम से इन पर लगाम लगाने के लिए कहा। राज्य की राजधानी के मसले पर किशोर ने कहा कि कांग्रेस पार्टी गैरसैंण को उत्तराखंड की राजधानी बनाने के पक्ष में है। पार्टी ने राज्य सरकार से गैरसैंण में अपने प्रदेश मुख्यालय के लिए जमीन दिलाने का आवेदन भी कर दिया है। केदारनाथ में राज्य सरकार द्वारा गौरीकुंड तक सड़क तैयार कर लिए जाने व सब कुछ बेहतर होने का दावा करते हुए किशोर ने 2013 की केदारनाथ आपदा से पूरे प्रदेश को प्रभावित बताने के लिए मीडिया को दोषी ठहराया। उनके शब्द थे, ‘इलेक्ट्रानिक व प्रिंट मीडिया ने केदारनाथ की आपदा को इस तरह दिखाया कि पूरे प्रदेश का पर्यटन प्रभावित हो गया, जबकि आपदा केवल सीमित क्षेत्र में आयी थी।’ पत्रकारों द्वारा यह याद दिलाने पर कि तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने यात्रियों-सैलानियों से प्रदेश में न आने का बयान दिया था, किशोर बगलें झांकते नजर आए। बमुश्किल बोले, यदि ऐसा था तो गलत था। सत्तापक्ष के विधायकों द्वारा राज्य सरकार की खिंचाई किये जाने के प्रश्न पर किशोर ने कहा कि अपने हितों को जनता के हितों का नाम देकर पेश करना गलत है। सदन में मर्यादित तरीके से ही अपनी बात उठाई जानी चाहिए। उन्होंने एक बार फिर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को लेकर अपनी टिप्पणी दोहराई। कहा, ‘अमित शाह अपने प्रदेश गुजरात से बाहर किए गए ‘तड़ीपार’ हैं। ऐसा व्यक्ति देश को कैसे संभाल सकता है। संभवतया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोई मजबूरी है, जो वह शाह को नजरअंदाज नहीं कर पा रहे हैं।’

सीएम को स्वस्थ होने के लिए दिया जाना चाहिए समय

नैनीताल। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय राज्य में अवरुद्ध विकास कायरे के लिए केंद्र सरकार को दोषी ठहराते रहे, लेकिन जब वह प्रदेश सरकार के कायरे के सवालों पर घिरे तो बोले, ‘मुख्यमंत्री हरीश रावत घायल हैं, उन्हें स्वस्थ होने का समय दिया जाना चाहिए। हम सभी देवभूमि के वासी हैं, हमें ऐसे संवेदनशील मामलों में बड़ा दिल रखना चाहिए।’

रविवार, 25 मई 2014

2009 में ही नैनीताल में दिखाई दे गई थी मोदी में ‘पीएम इन फ्यूचर’ की छवि

छह मई 2009 को नैनीताल के फ्लैट्स मैदान में विशाल जनसभा को संबोधित करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।
-अपनी फायरब्रांड हिंदूवादी नेता की छवि के विपरीत की थी गुजरात के विकास की बात
-यूपीए को ‘अनलिमिटेड प्राइममिनिस्टर्स एलाइंस’ और सोनिया, राहुल व प्रियंका गांधी के लिए किया था ‘एसआरपी’ शब्द का प्रयोग
नवीन जोशी, नैनीताल। देश के मनोनीत प्रधानमंत्री एवं आज देश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ले रहे नरेंद्र भाई दामोदर दास मोदी वर्ष 2009 में छह मई को लोक सभा चुनाव के प्रचार के लिए भाजपा प्रत्याशी बची सिंह रावत के प्रचार के लिए नैनीताल आए थे। नैनीताल में उस दौर की जनसभाओं के लिहाज से पहली बार भारी भीड़ उमड़ी थी, और लोग भाजपा के तत्कालीन ‘पीएम इन वेटिंग’ लाल कृष्ण आडवाणी की जगह मोदी के मुखौटे चेहरों पर लगा कर रैली में आए थे। साफ था कि मोदी तभी से आज के दिन की तैयारी कर रहे थे। उनके भाषणों में गुजरात का विकास पूरी तरह से छाया हुआ था। अपनी रौ में मोदी ने यहां जो कहा, उसमें विकास का मतलब ‘गुजरात’ हो गया और यूपीए सरकार के साथ ही एनडीए काल की ‘दिल्ली’ भी मानो कहीं गुम हो गई थी। उन्होंने यहां आडवाणी का नाम भी केवल एक बार उनके (आडवाणी के द्वारा) तत्कालीन प्रधानमंत्री डा.मनमोहन सिंह को कमजोर कहने के एक संदर्भ के अलावा कहीं नहीं लिया था। 
नैनीताल में मोदी को माता नंदा-सुनंदा के चित्र युक्त प्रतीक चिन्ह भेंट करते बची सिंह रावत, बलराज पासी व अन्य स्थानीय नेता। 
नैनीताल के ऐतिहासिक डीएसए फ्लैट्स मैदान में हुई उस जनसभा में मोदी अपने भाषण में पूरी तरह गुजरात केंद्रित हो गऐ थे। उनकी आवाज में यह कहते हुऐ गर्व था कि कभी व्यापारियों का माना जाने वाला गुजरात उनकी विकास परक सरकार आने के बाद से न केवल औद्योगिक क्षेत्र में वरन बकौल उनके एक अमेरिकी शोध अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर खारे पानी के समुद्र और रेगिस्तान से घिरा गुजरात कृषि क्षेत्र में वृद्धि के लिए भी देश में प्रथम स्थान पर आ गया है। उन्होंने बताया, गरीबों के हितों के लिए चलाऐ जाने वाले 20 सूत्रीय कार्यक्रमों में गुजरात नंबर एक पर रहा है, साथ ही सूची में प्रथम पांच स्थानों पर भाजपा शासित और प्रथम 10 स्थानों पर एनडीए शासित राज्य ही हैं, तथा एक भी कांग्रेस शासित राज्य नहीं है। इन आंकड़ों के जरिए उन्होंने पूछा कि ऐसे में कैसे ‘कांग्रेस का हाथ गरीबों व आम आदमी के साथ’ हो सकता है। मोदी ने गुजरात की कांग्रेस शासित राज्य आसाम से भी तुलना की। कहा, दोनों राज्य समान प्रकृति के पड़ोसियों बांग्लादेश और पाकिस्तान से सटे हैं। आसाम के मुसलमान परेशान हैं कि वहां भारी संख्या में हो रही बांग्लादेशियों की अवैध घुसपैठ से उन्हें काम और पहले जैसी मजदूरी नहीं मिल रही। यूपीए नेता घुसपैठियों को वोट की राजनीति के चलते नागरिकता देने की मांग कर रहे हैं, वहीं पाकिस्तानी गुजरात में घुसने की हिम्मत करना तो दूर उनसे (मोदी से) डरे बैठे हैं। हालांकि मोदी को इस दौरान पूर्व की एनडीए सरकार की कोई उपलब्धि बताने के लिए याद नहीं आई, पर उन्होंने उत्तराखंड की तत्कालीन खंडूड़ी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की तारीफ अवश्य की। कहा, एकमात्र विकास ही देश को बचा सकता है। अपनी फायरब्रांड और कट्टर हिंदूवादी नेता की पहचान वाले मोदी अपनी छवि के अनुरूप एक शब्द भी नहीं बोले, जिससे सुनने वालों में थोड़ी बेचैनी भी देखी गई थी।
इसके अलावा मोदी शब्दों को अलग विस्तार देने व अलग अर्थ निकालने की कला भी नैनीताल में दिखा गए थे। उन्होंने यूपीए को ‘अनलिमिटेड प्राइममिनिस्टर्स एलाऐंस’ यानी असीमित प्रधानमंत्रियों का गठबंधन करार दिया। कहा कि शरद पवार, लालू यादव, पासवान सहित यूपीए के सभी घटक दलों के नेता प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह के बजाय स्वयं को भावी प्रधानमंत्री बता रहे हैं, वहीं गांधी परिवार के अलावा कांग्रेस के एक भी वरिष्ठ नेता ने उनका नाम प्रधानमंत्री के रूप में नहीं लिया। उन्होंने गांधी परिवार के लिए ‘एसआरपी’ (सोनिया, राहुल व प्रियंका ) शब्द का प्रयोग करते हुए पूछा, क्या एसआरपी ही देश का अगला प्रधानमंत्री तय करेंगे। 

मंगलवार, 6 मई 2014

बिना पार्टियों के चुनाव घोषणा पत्र के ही हो रहे लोक सभा चुनाव !


चुनाव में अब तक जुबानी खर्च ही करते रहे प्रत्याशी, 
प्रचार के आखिरी दिन तक नहीं पहुंचे भाजपा-कांग्रेस सहित किसी भी राष्ट्रीय दल के चुनाव घोषणा पत्र
नवीन जोशी, नैनीताल। चुनावों के लिए पेश किये जाने वाले घोषणा पत्र राजनीतिक दलों के लिए खास होते हैं। जनता अपनी चुनी हुई सरकार से उसके चुनाव पूर्व प्रस्तुत घोषणा पत्र के आधार पर ही जवाब-तलब करती है, मगर संभवत: यह पहली बार होगा कि कुमाऊं मंडल और जिला मुख्यालय में लोकसभा चुनाव की समय सीमा समाप्त होने के दिन तक भाजपा व कांग्रेस सहित किसी दल के घोषणा पत्र नहीं पहुंचे हैं। ऐसे में राजनीतिक दल जनता को अपने घोषणा पत्र नहीं दिखा रहे हैं और हवा-हवाई आरोप- प्रत्यारोपों के आधार पर ही वोट व समर्थन जुटा रहे हैं और संभवत: जनता भी जुबानी वादोंदा वों में ऐसे उलझी है कि वह भी राजनीतिक दलों से चुनाव घोषणा पत्र पढ़ने-संभालने को नहीं मांग रही है। गुजरे दौर में खासकर राजनीतिक दल अपने ही नहीं अन्य पार्टियों के चुनाव घोषणा पत्र अपने चुनाव कार्यालयों में रखते थे, ताकि जनता को दोनों की नीतियों और वादों का अंतर समझाया जा सके। ‘राष्ट्रीय सहारा’ ने सोमवार को लोकसभा चुनाव में प्रचार की समय सीमा समाप्त होने के दिन मुख्यालय में राजनीतिक दलों के चुनाव कार्यालयों का जायजा लिया, मगर किसी दल के चुनाव कार्यालय में पार्टी के चुनाव घोषणा पत्र उपलब्ध नहीं थे। इस बारे में पूछने पर कहा गया कि इंटरनेट पर घोषणा पत्र उपलब्ध है यह जानते हुए कि देश-प्रदेश में इंटरनेट की उपलब्धता सीमित है। इसके साथ ही घोषणा पत्र किस यूआरएल पते या वेबसाइट पर उपलब्ध हैं इसकी जानकारी भी पार्टी के पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को नहीं है।
लगा प्रचार शुरू ही नहीं हुआ
नैनीताल। इस लोकसभा चुनाव में सही मायनों में पहाड़ पर और खासकर नैनीताल सीट व कुमाऊं मंडल तथा जिले के मुख्यालय में चुनाव प्रचार ठीक से शुरू ही नहीं हुआ था और यह सोमवार को प्रचार की समय सीमा समाप्त होने के साथ खत्म भी हो गया। इस दौरान स्टार प्रचारक कहने भर को यहां केवल भाजपा की ओर से शक्ति कपूर व आप की ओर से भगवंत मान और कांग्रेस के लिए सीएम हरीश रावत ही पहुंचे।

मंगलवार, 15 अप्रैल 2014

नैनीताल में जीतने वाली पार्टी की ही केंद्र में बनती रही है सरकार

बदलाव की हर बयार में नैनीताल ने भी बदली है करवट, कइयों को राजनीति का ककहरा पढ़ाया है इस सीट ने
नवीन जोशी नैनीताल। शिक्षित संसदीय क्षेत्रों में शुमार नैनीताल ने देश में चल रही हर बदलाव की बयार में खुद भी करवट बदली है। देश में अच्छी सरकार चलती रही तो यहां के मतदाताओं ने भी अपने परम्परागत स्वरूप को बरकरार रखते हुए सत्तारूढ़ पार्टी के प्रत्याशी को ही ‘सिर-माथे' पर बिठाया है, लेकिन जहां सत्तारूढ़ पार्टी ने चूक की और नैनीताल को अपनी परम्परागत सीट मानकर गुमान में रही, उसे यहां के मतदाताओं ने जमीन भी दिखा दी। नैनीताल में आमतौर पर जिस पार्टी का प्रत्याशी जीता, उसी पार्टी की देश में सरकार भी बनती रही। इस प्रकार नैनीताल के साथ यह मिथक जुड़ता चला गया है। ऐसे में नैनीताल राजनीतिक दलों के लिए दिल्ली की गद्दी पाने का माध्यम बन सकता है। 
जी हां, नैनीताल लोकसभा सीट का अब तक ऐसा ही अतीत रहा है। वर्ष 1971 तक के चुनाव में मतदाताओं ने कुछ खास नेताओं को गले लगाया। इसके बाद उन्होंने अपना रुख बदल लिया और किसी भी नेता को दुबारा संसद पहुंचने का मौका नहीं दिया। देश की आजादी के बाद भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत के परिवार और बाद में एनडी तिवारी सरीखे नेताओं की यह परंपरागत सीट रही और दोनों को संसद पहुंचने की सीढ़ी चढ़ने का ककहरा नैनीताल ने ही सिखाया। मगर यह भी मानना होगा कि यहां के मतदाताओं की मंशा को कोई नेता नहीं समझ पाया। हालांकि एनडी भी यहां से हारे और केसी पंत भी। इसी तरह कांग्रेस की परंपरागत सीट माने जाने के बावजूद कांग्रेस के नेता भी हर चुनाव में यहां असमंजस के दौर से ही गुजरते हैं, जबकि देश की सत्ता संभाल चुकी भाजपा यहां से सिर्फ दो ही बार ही जीत हासिल की है। जनता पार्टी और जनता दल के नेताओं के लिए भी यहां प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला है। देश में चल रही राजनीतिक हवा का असर नैनीताल सीट पर भी पड़ता रहा है। 1951 व 1957 के चुनाव में पंडित गोविंद बल्लभ पंत के दामाद सीडी पांडे और 1962 से 1971 तक के तीन चुनावों में पुत्र केसी पंत यहां से सांसद रहे। मगर 1977 के चुनाव में आपातकाल के दौर में पंत को भारतीय लोकदल के नए चेहरे भारत भूषण ने पराजित कर दिया। तब देश में पहली बार विपक्ष की सरकार बनी। लेकिन विपक्ष का प्रयोग विफल रहने पर 1980 में एनडी तिवारी को उनके पहले संसदीय चुनाव में नैनीताल ने दिल्ली पहुंचा दिया। गौरतलब है कि 1984 में तिवारी सांसदी छोड़ यूपी का सीएम बनने चले तो उनके शागिर्द सतेंद्र चंद्र गुड़िया को भी जनता ने वही सम्मान दिया। 1989 के चुनाव में मंडल आयोग की हवा चली तो जनता दल के नए चेहरे डा. महेंद्र पाल चुनाव जीत गए और जनता दल की ही केंद्र में सरकार बनी। 1991 के चुनाव में यहां के मतदाता देश में चल रही राम लहर की हवा में बहे और बलराज पासी ने भाजपा के टिकट पर जीतकर इतिहास रच दिया। तब केंद्र में भाजपा की सरकार बनी। 1998 में बीच में एचडी देवगौड़ा और आरके गुजराल के नेतृत्व वाली जनता दल की सरकार की विफलता के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा की इला पंत ने एनडी तिवारी को पटखनी दी और दुबारा केंद्र में भाजपा की सरकार बनी। इसके बाद से 2004 व 2009 के चुनावों में कांग्रेस के केसी सिंह बाबा यहां से सांसद हैं और दोनों मौकों पर कांग्रेस की सरकार ही देश में बनी।

एनडी ने दो बार तोड़ा है मिथक

नैनीताल। नैनीताल में जीतने वाली पार्टी की ही केंद्र में सरकार बनती रही है, मगर एनडी तिवारी 1996 और 1999 में वह विरोधी पार्टियों की लहर में भी नैनीताल से चुनाव जीतने में कामयाब रहे। 1996 में एनडी तिवारी ने कांग्रेस से नाराज होकर सतपाल महाराज शीशराम ओला व अन्य के साथ मिलकर कांग्रेस (तिवारी) बनाई और उनकी पार्टी चुनाव जीतने में सफल रही। इस चुनाव के बाद केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनी। 1999 के चुनाव में भी एनडी तिवारी ने फिर अपवाद दोहराया, जब कांग्रेस से तिवारी तीसरी बार चुनाव जीते, लेकिन फिर केंद्र में भाजपा की ही सरकार बनी। वर्ष 2002 में उनके उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बनने पर हुए उपचुनाव में जद से कांग्रेस में आए डा. महेंद्र पाल भी उनकी सीट बचाने में सफल रहे।

गुरुवार, 10 अप्रैल 2014

नैनीताल से भाजपा-कांग्रेस जो भी जीतेगा, दोनों की होगी हैट-ट्रिक

बाबा व भाजपा को तीसरी जीत की चाहत
नवीन जोशी नैनीताल। नैनीताल लोकसभा सीट पर इस बार रोचक मुकाबला देखने को मिलेगा। इस सीट पर यदि भाजपा जीतती है तो यह उसकी हैट्रिक होगी, और यदि कांग्रेस को जीत मिलती है तो यह केसी बाबा की लगातार तीसरी जीत होगी। भाजपा और कांग्रेस के अलावा यहां आम आदमी पार्टी भी दमदार उपस्थिति दर्ज करा रही है। ऐसे में इस सीट पर त्रिकोणीय संघर्ष देखने को मिल सकता है। नैनीताल सीट देश की राजनीति के दो धुरंधर नारायण दत्त तिवारी और केसी पंत की परम्परागत सीट रही है। नैनीताल में हमेशा ऐसा कुछ ना कुछ होता है कि इस सीट पर बड़े राजनीतिक शूरमाओं की प्रतिष्ठा जुड़ी होती है, फलस्वरूप देश-प्रदेश की इस सीट पर नजर रहती है। इस बार यहां मुख्य मुकाबला पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा प्रत्याशी भगत सिंह कोश्यारी व मौजूदा सांसद केसी बाबा के बीच है। इसके अलावा आम आदमी पार्टी के टिकट पर जनकवि बल्ली सिंह चीमा भी संसद पहुंचने की होड़ में शामिल हैं। लोकसभा क्षेत्र की 14 विधानसभा सीटों में से आठ में विपक्षी भाजपा के विधायकों और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष, तीन काबीना मंत्रियों और पूर्व सीएम का इसी क्षेत्र से होना भी इसे प्रदेश की वीवीआईपी सीटों में शुमार करती है। भाजपा यहां से जीतेगी, तो उसके लिए यह अब तक के संसदीय इतिहास की इस सीट से तीसरी जीत होगी, क्योंकि उनसे पहले केवल बलराज पासी और इला पंत ही भाजपा के टिकट पर चुनाव जीत पाए हैं। वहीं कांग्रेस जीती तो उसके प्रत्याशी के लिए भी यह व्यक्तिगत तौर पर लगातार व तीसरी जीत होगी। बसपा उम्मीदवार लईक अहमद भी मुकाबले में आने के लिए पूरा जोर लगाए हुए हैं।

मंगलवार, 8 अप्रैल 2014

नैनीताल में नैया पार लगाने को भाजपा को चाहिए मोदी, नकवी और सिद्धू

युवा, मुस्लिम और सिख वोटरों को साधने की है कोशिश
नवीन जोशी, नैनीताल। देश-प्रदेश में चल रही मोदी के पक्ष और कांग्रेस विरोधी लहर के बीच भाजपा को नैनीताल लोक सभा सीट पर अपनी नैया को पार लगाने के लिए नरेन्द्र मोदी, पार्टी के मुस्लिम चेहरे मुख्तार अब्बास नकवी और नवजोत सिंह सिद्धू की जरूरत है। पार्टी की नैनीताल लोक सभा क्षेत्र की इकाई ने अपनी इस इच्छा से पार्टी हाइकमान को अवगत करा दिया है। मोदी को हल्द्वानी, नकवी को काशीपुर, रुद्रपुर या हल्द्वानी और सिद्धू को बाजपुर या रुद्रपुर लाने की इच्छा जताई गई है। 
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भाजपा सूत्रों की मानें तो पार्टी के वरिष्ठ नेता नैनीताल की सीट को लेकर काफी गंभीर हैं। कारण, कांग्रेस यहां यूपी के दौर से ही मजबूत रही है। यहां किसी भी अन्य पार्टी प्रत्याशी का कांग्रेस प्रत्याशी को हराने का रिकार्ड संयोग से कांग्रेस पार्टी की उत्तराखंड व उप्र सरकार के मुखिया रहे एनडी तिवारी के नाम पर है। तिवारी ने 1996 के चुनाव में कांग्रेस से नाराजगी के बाद बनाई अपनी कांग्रेस-तिवारी के टिकट पर भाजपा की इला पंत को 1.56 लाख वोटों से हराया था, इससे पहले 1977 में भारतीय लोक दल ने आपातकाल के बाद ‘इंदिरा हटाओ’ की लहर के दौर में कांग्रेस के केसी पंत को 85 हजार वोटों से और 1989 में मंडल आंदोलन की पृष्ठभूमि में हुए चुनावों में जनता दल के डा. महेंद्र पाल ने 20 हजार वोटों से यह सीट जीती थी। भाजपा के प्रत्याशी इस सीट को केवल दो बार, 1991 की राम लहर में बलराज पासी केवल 11 हजार और 1998 में इला पंत 15 हजार वोटों के अंतर से ही जीते थे। यह भी एक महत्वपूर्ण बिंदु है कि पासी, इला व पाल की जीतों में बहेड़ी विधानसभा क्षेत्र की बड़ी भूमिका रही थी, जो कि उत्तराखंड बनने के बाद इस लोक सभा क्षेत्र से अलग हो चुका है। हालिया दो चुनावों की बात की जाए तो मौजूदा सांसद, केसी सिंह बाबा ने 2004 में 49 हजार और 2009 में करीब 88 हजार वोटों के अंतर से जीतकर अपने जीत का अंतर बढ़ाया है। यही बिंदु भाजपा की चिंता का बड़ा कारण भी है। ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए भाजपा वर्गवार मतदाताओं को साधने की कोशिश में है। पार्टी की सबसे बड़ी चिंता करीब 2.75 लाख मुस्लिम और करीब 1.5-1.5 लाख सिख व अनुसूचित वर्ग के वोटों को लेकर है। पार्टी का मानना है कि 2009 के चुनाव में आखिरी दौर में धर्म विशेष के प्रचारकों के भाजपा के विरोध में माहौल बनाने व अन्य पार्टियों से कोई मजबूत मुस्लिम प्रत्याशी न होने की वजह से मुस्लिम मतों और तराई क्षेत्र में प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह के आने से सिख मतों के कांग्रेस के पक्ष में ध्रुवीकरण हो जाने की वजह से पार्टी हार गई थी। 
लेकिन इससे इतर भाजपा इस बार स्वयं को मोदी के पक्ष और कांग्रेस के विरोध की लहर, दो बार के सांसद बाबा के प्रति भी एंटी इंकमबेंसी व उनके क्षेत्र में मौजूद न रहने, बसपा से मुस्लिम प्रत्याशी घोषित होने से मुस्लिम वोटों का कांग्रेस के पक्ष में ध्रुवीकरण न होने की संभावना के मद्देनजर स्वयं को लाभ में मान रही है। बावजूद वह कोई जोखिम लेने के मूड में भी नहीं है। इस उद्देश्य से युवाओं व हर वर्ग को रिझाने के लिए लोक सभा क्षेत्र के केंद्र में स्थित हल्द्वानी में मोदी, मुस्लिम बहुल काशीपुर, रुद्रपुर क्षेत्र में नकवी एवं सिख बहुल बाजपुर, रुद्रपुर क्षेत्र में सिद्धू को लाये जाने की रणनीति बनाई गई है।

शनिवार, 7 दिसंबर 2013

मोदी की रैली पर शादियों के लग्न भारी !

शादियों की वजह से रैली के लिए गाड़ियां मिलने में हो रही परेशानी, पर भाजपाइयों में दिख रहा भारी जोश
नवीन जोशी नैनीताल। 15 दिसम्बर को दून में हो रही भाजपा के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी की रैली की राह को इस दौरान और खासकर रैली के दिन तक ही उपलब्ध शादियों के लग्न प्रभावित कर रहे हैं। चूंकि शादियों के लग्न 14 तक ही हैं और इधर मौसम भी अधिक सर्द नहीं हुआ है। इस दौरान जनता के साथ ही अनेक भाजपा कार्यकर्ता भी अपने निकटस्थों की शादियों में आमंत्रित और व्यस्त हैं। शादियों के लिए पहले से ही बुक होने की वजह से भाजपाइयों को रैली में जाने के लिए बसें ठीक से उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं लेकिन शायद मोदी को देखने और सुनने का उत्साह ही है कि ऐसी स्थितियों के बावजूद भाजपाई रैली में हर हाल में जाने की बात कह रहे हैं। 
मंडल व जिला मुख्यालय में जहां एक ओर भाजपा कार्यकर्ताओं में मोदी की रैली के प्रति जोश दिख रहा है, वहीं वह प्रदेश हाईकमान द्वारा रैली के लिए दिए गए लक्ष्यों को लेकर परेशान हैं। इसका कारण यह है कि करीब एक हजार कार्यकर्ताओं को देहरादून ले जाना है। इनमें से अन्य लोग तो अपने प्रबंधों से दून चले जाएंगे लेकिन संगठन को करीब डेढ़ सौ कार्यकर्ताओं को दून ले जाने की व्यवस्था करने को कहा गया है। इस हेतु कम से कम पांच बसों की आवश्यकता है। बसों की व्यवस्था में जुटे एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि आम तौर पर नैनीताल से दून के लिए 18 हजार रुपये में बसें मिल जाती हैं लेकिन इधर शादियों में व्यस्त होने के कारण 25 हजार रुपये से कम में बसें नहीं मिल पा रही हैं। हालांकि ऐसे कार्यकर्ता भी मिले। जिन्होंने कहा कि बसें मिले चाहे न मिलें, भले ट्रकों में लटककर जाना पड़े लेकिन दून जरूर जाएंगे। क्योंकि मोदी के रूप में भाजपा को सत्ता में लौटाने का जो मौका मिला है, उसे चूकेंगे नहीं। इस बारे में भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रकाश पंत ने भी स्वीकारा कि शादियों की वजह से शंखनाद रैली के प्रबंधों में दिक्कत तो आ रही है लेकिन कार्यकर्ताओं का जोश देखते हुए रैली में भीड़ जुटाने में कोई कठिनाई नहीं है।

रविवार, 4 अगस्त 2013

कैलास मानसरोवर यात्रा रोकना गैर हिंदूवादी कदम : भाजपा

नैनीताल (एसएनबी)। प्रदेश भाजपा ने कैलास मानसरोवर यात्रा को निरस्त करने के लिए प्रदेश सरकार का गैर हिंदूवादी कदम और दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता सुरेश जोशी ने कहा कि यह देश के करोड़ों आस्थावान हिंदू समाज की भावनाओं से खिलवाड़ है। सरकार को तत्काल ही अपने निर्णय में बदलाव कर यात्रियों को मुफ्त हेलीकॉप्टर सुविधा दिलाकर यात्रा को शुरू करानी चाहिए। उन्होंने प्रदेश सरकार को चेताया दी कि आगे इस कदम के बाद उत्तराखंड के यात्रा मार्ग को असुरक्षित बताकर अरुणांचल व लद्दाख से कैलास मानसरोवर के लिए नए मार्ग खोले जा सकते हैं, इससे उत्तराखंड एक बड़ा आर्थिक श्रोत भी खो देगा। 
जोशी रविवार को पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बिशन सिंह चुफाल के साथ देहरादून लौटते हुए मुख्यालय स्थित राज्य अतिथि गृह में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। कहा, कैलाश यात्रा मार्ग में केवल नदी के बगल से होकर जाने वाले रास्ते में नुकसान हुआ है, जबकि नैनीताल से सौसा, जिप्ती या गुंजी तक एमजी-17 हेलीकॉप्टर के अधिकतम तीन चक्कर लगाकर श्रद्धालुओं को कैलास यात्रा कराई जा सकती है। "˜राष्ट्रीय सहारा" पूर्व में ही कैलास मानसरोवर यात्रा को इसी तरह नैनीताल से सौसा या जिप्ती तक हेलीकॉप्टर सुविधा के जरिए संचालित करने का विकल्प सुझा चुका है। जोशी ने कहा कि यात्रा के स्थगित होने से हमेशा के लिए उत्तराखंड से यह सेवा छिनने का खतरा भी उत्पन्न हो सकता है। इस मौके पर सांसद प्रतिनिधि मनोज जोशी व संतोष साह मौजूद थे।

निकटवर्ती वन भूमि पर तत्काल विस्थापन हो, पर सीमांत क्षेत्र खाली भी न हो : चुफाल

नैनीताल। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बिशन सिंह चुफाल ने सीमांत क्षेत्रों में आपदा प्रभावितों का नहीं वरन पूरे आपदा प्रभावित गांवों को विस्थापन करने की आवश्यकता जताई है। साथ ही चेताया है कि विस्थापन से सीमांत क्षेत्र के गांव खाली न हो जाएं। विस्थापितों को केवल रहने के लिए मकान ही नहीं वरन आजीविका के लिए आपदा में बरबाद हुई पूरी जमीन निकटवर्ती वन भूमि में ही देने की मांग की। उन्होंने प्रदेश सरकार पर आपदा के डेढ़ माह गुजरने के बाद सड़कें तो दूर आपदा में नष्ट हुए पैदल मार्ग भी दुरुस्त न कर पाने का आरोप लगाया। पैदल रास्ते ही बन जाएं, तो बड़ी बकरियों के जरिए भी दूरस्थ उच्च हिमालयी क्षेत्रों में खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा सकता है। पत्रकारों से वार्ता करते भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बिशन सिंह चुफाल व अन्य। 

गुरुवार, 21 फ़रवरी 2013

तीरथ का कुमाऊं दौरा: "फील गुड˜ के साथ ही मिला "फीड बैक"



भाजपा संगठन के विस्तार की आहट से चौकन्ने दिखे कार्यकर्ता, पलक-पांवड़े बिछाने में नहीं रखी कोई कसर 
नवीन जोशी, नैनीताल। भाजपा के नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत को उनका कुमाऊं दौरा "फील गुड" और साथ ही आसन्न संगठन विस्तार से लेकर निकाय, पंचायत व लोक सभा चुनावों में पार्टी प्रत्याशियों की बाबत ˜फीड बैक" भी दे गया है। इस "फील गुड" के कारक भी इसी "˜फीड बैक" में छुपे हुए हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं ने नए अध्यक्ष के समक्ष अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के लिए अपनी गुटीय निष्ठाओं को दरकिनार कर जिस तरह पलक पांवड़े बिछाए, उससे ˜फील गुड इफेक्ट" के साथ ही संगठन विस्तार व आगामी चुनावों के लिए ˜फीड बैक" भी लेकर तीरथ कुमाऊं से लौटे हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के रूप में तीरथ ने अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरूआत उस कुमाऊं मंडल से की, जिसे उनकी ताजपोशी के विरोधी रहे गुट का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है। उनकी ताजपोशी से पहले चरम पर पहुंचा राज्य के ˜थ्री जी" गुटों का आपसी विवाद और उनके दौरे से ठीक एक दिन पहले हल्द्वानी में भी दो पूर्व दर्जाप्राप्त मंत्रियों के विवाद के साथ पुलिस थाने तक भी जा पहुंचा था। इसके बावजूद तीरथ का कुमाऊं में आगमन हुआ तो जसपुर में मंडल की सीमा में प्रवेश से लेकर काशीपुर, बाजपुर, दिनेशपुर, रुद्रपुर, हल्द्वानी, भीमताल, भवाली, कालाढूंगी और रामनगर तक विरोधी बताए जाने वाले गुटीय नेताओं के साथ छपे उनके विशालकाय होर्डिग, पोस्टर देखकर तीरथ ने भी कहा कि वह ˜निर्गुट" नेता हैं। दरअसल उनके ˜दिल खोल" स्वागत के पीछे आसन्न परिस्थितियां हैं। पार्टी की जिला इकाइयों के विस्तार के साथ ही भाजयुमो जैसी आनुषांगिक इकाइयों व प्रकोष्ठों का जल्द गठन होना है। निकाय और पंचायत चुनाव मुंह बाये खड़े हैं तो लोस चुनाव भी दूर नहीं हैं। ऐसे में नैनीताल-ऊधमसिंहनगर जिले की संसदीय सीट के दो दावेदारों बची सिंह रावत व बलराज पासी से लेकर कई पूर्व दर्जाप्राप्त मंत्री तथा पार्टी के पूर्व व निवर्तमान पदाधिकारी उनके स्वागत में पोस्टरों के तोरणद्वार सजाते हुए वास्तव में ˜मुंह दिखाई" की प्रतिस्पर्धा करने को मजबूर रहे। इस कोशिश में अनेक ˜राजनीतिज्ञों" ने तो अपनी मजबूत बताई जाने वाली गुटीय निष्ठा भी ताक पर रखने से गुरेज नहीं किया। तीरथ बृहस्पतिवार को नैनीताल क्लब में ˜राष्ट्रीय सहारा" से एक खास भेंट में इस ˜फील गुड" से खासे उत्साहित दिखे। उन्होंने कहा, उनकी कोशिश इस जोश को बरकरार रखने की रहेगी। उनकी पार्टी कार्यकर्ताओं की पार्टी है।

कोश्यारी के गढ़ में सेंध लगाने में रहे सफल 
नैनीताल। भाजपा के दिग्गज नेता भगत सिंह कोश्यारी के गढ़ में तीन दिवसीय दौरे के माध्यम से सेंध लगाकर कोश्यारी को अलग-थलग करने की योजना आखिर परवान चढ़ ही गई। संगठन में प्रदेश अध्यक्ष के मुद्दे पर इन दिनों पार्टी से खफा भगत सिंह कोश्यारी के गढ़ में नये अध्यक्ष का दौरा सफल कराकर पार्टी कोश्यारी को जो संकेत देना चाहती थी, उसमें पार्टी के रणनीतिकार सफल रहे। पूरे दौर के दौरान जिस प्रकार से पार्टी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री बची सिंह रावत, पूर्व अध्यक्ष पूरन शर्मा, पूर्व मंत्री बंशीधर भगत जैसे दिग्गजों को दौरे की कमान देकर प्रदेश अध्यक्ष का दौरा सफल कराया है, उससे कोश्यारी खेमे को संकेत मिल गया है कि फिलहाल संगठन पर खंडूड़ी व निशंक खेमा ही हावी रहेगा।


संगठन विस्तार प्रांतीय परिषद की बैठक तक
नैनीताल। तीरथ ने कहा कि आगामी 16-17 मार्च को आयोजित होने जा रही प्रांतीय परिषद की बैठक तक संगठन का विस्तार कर लेंगे। उन्होंने कहा कि संगठन में युवाओं को स्थान देना उनकी प्राथमिकता में होगा। महिलाओं को भी खास तरजीह दी जाएगी। साथ ही अनुसूचित जाति सहित सभी जातियों, वर्गों, समाज के लोगों को संगठन में स्थान देकर पार्टी सर्वग्राही, सर्वस्पर्शी व सर्वव्यापी स्वरूप प्रदर्शित करेगी। हालांकि एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने स्वीकारा कि उनकी ˜राष्ट्रीय सोच" वाली कही जाने वाली पार्टी में राष्ट्रीय सोच दिखाई नहीं देती है। क्षेत्र व जाति के समीकरणों के आधार पर पद मिलते हैं। साथ ही उन्होंने आश्वस्त किया कि वह पार्टी के प्रति आस्थावान एवं कार्य क्षमतायुक्त लोगों को ही जिम्मेदारियां देंगे। उन्होंने राज्य सरकार पर गैरसैंण पर राजनीतिक ढकोसला करने का आरोप लगाते हुए गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने की मांग की। उन्होंने प्रदेश सरकार पर अपने मंत्रियों को विदेश यात्रा कराकर व अन्य तरीकों से खुश कर केवल स्वयं को बचाने और जनता की ओर पीठ फेर लेने का आरोप भी लगाया।


हां, लोक सभा का दावेदार हूं : बचदा

नैनीताल। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे बची सिंह रावत ˜बचदा" के साथ ही पूर्व सांसद बलराज पासी लगातार साथ रहे। बचदा पिछली बार नैनीताल सीट से लोक सभा का चुनाव लड़कर हार चुके हैं, जबकि बलराज के नाम एनडी तिवारी को हराने का रिकार्ड दर्ज है। हालांकि इस सीट से अब तक पूर्व सीएम भगत सिंह कोश्यारी के चुनाव लड़ने की संभावनाएं सर्वाधिक बताई जा रही थीं, लेकिन बदले हालात में बचदा और बलराज मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। बचदा ने बृहस्पतिवार को इशारों में कहा भी कि उनका स्वाभाविक दावा है। साथ ही वह यह कहने से भी नहीं भूले कि तीरथ में संगठन को लेकर अपार संभावनाएं हैं। उनकी कार्यक्षमता को वह अपने प्रदेशाध्यक्ष के कार्यकाल के दौरान प्रदेश महामंत्री के रूप में देख चुके हैं।

सोमवार, 23 जनवरी 2012

भाजपा का अगला कार्यकाल पहाड़ को होगा समर्पित : बचदा


पीपीपी मोड में 50 हजार करोड़ रुपये के निवेश से पहाड़ में उद्योग व किसानों को सस्ते लोन देने का वादा
जल, जंगल, जमीन के मुद्दे पर पार्टी को बेहद सचेत बताया
नैनीताल (एसएनबी)। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं चुनाव घोषणा पत्र समिति के संयोजक बची सिंह रावत ‘बचदा’ ने कहा कि वर्तमान कार्यकाल में भाजपा ने मैदानी क्षेत्रों में विकास की गंगा बहाई है जबकि अगला कार्यकाल पर्वतीय क्षेत्रों के विकास के नाम रहेगा। पार्टी के चुनाव घोषणा पत्र का हवाला देते हुए उन्होंने पीपीपी मोड में पहाड़ पर 50 हजार करोड़ रुपये का निवेश करवाने, औद्योगिक विकास करने, लघु एवं सीमांत किसानों को महज दो फीसद ब्याज पर कृषि ऋ ण देने तथा चार लाख हेक्टेयर बेनाप रक्षित वन भूमि का प्रबंधन कर विकास कायरे को गति देने एवं भूमिहीनों को भूमि देने तथा फलों के बीमा की योजना लाने जैसे कई वायदे किये हैं। सोमवार को नगर के पत्रकारों से वार्ता में बचदा ने कहा कि भाजपा उत्तराखंड की अवधारणा से जुड़े मुद्दों के प्रति खासी सचेत है। खेती, किसान और भूमि भाजपा के चुनाव घोषणा पत्र में प्रमुख मुद्दे हैं। वर्ग चार जैसी भूमि पर दशकों से काबिज लोगों को स्वामित्व परिवर्तन के अधिकार दिये जाएंगे। सरकार ने 1893 के अंग्रेजों के जमाने के कानून को समाप्त कर करीब चार लाख हेक्टेयर बेनाप रक्षित भूमि को मुक्त कराया है, अब अगले कार्यकाल में इसका प्रबंधन करेंगे। इस मौके पर पार्टी जिलाध्यक्ष भुवन हरबोला, विस संयोजक बालम मेहरा, जिला मंत्री विवेक साह, मनोज साह, मनोज जोशी, हिमांशु जोशी आदि भी मौजूद थे। 

निशंक का बचाव किया 
नैनीताल। भाजपा के वरिष्ठ नेता बची सिंह रावत ने टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल द्वारा पूर्व सीएम डा. निशंक पर की गई टिप्पणी पर पार्टी के पूरी मजबूती से उनके साथ होने की बात कही। उन्होंने कहा कि निशंक उतने ही पाक-साफ हैं, जितना कोई और। उन्होंने कहा कि कायरे में अनियमितता हो सकती है पर भ्रष्टाचार का सवाल ही नहीं है। उन पर आरोप लगाने वालों को पहले शिकायत दर्ज करनी चाहिए।
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मंगलवार, 17 जनवरी 2012

कालाढूंगी के चक्रव्यूह में फंस गये भाजपा के "बंशीधर"



चुनाव समीक्षा : कालाढूंगी विस क्षेत्र
भगत के लिए आसान नहीं जीत की राह, घिरे हैं चतुष्कोणीय मुकाबले में

प्रदेश की सर्वाधिक मुश्किल सीटों में है कालाढूंगी, 11 में से छह प्रत्याशी हैं मुकाबले में, 
नवीन जोशीनैनीताल। कालाढूंगी विस सीट को यदि प्रदेश की सर्वाधिक फंसी हुई सीट कहें तो अतिशयोक्ति न होगी। यहां विस चुनाव का बिगुल बजने से कहीं पूर्व दावेदारों का ‘संघषर्’ शुरू हो गया था। खासकर भाजपा- कांग्रेस के दावेदार इस सीट को ‘हॉट केक’ मानकर गटक जाने के ऐसे अतिविास में देखे गये कि मानो उन्हें टिकट मिला और उनका विधायक बनना निश्चित हो। टिकट पाने को सर्वाधिक सिर-फुटव्वल इस सीट पर देखी गई। अब जबकि पार्टियों के प्रत्याशी नामांकन करा चुके हैं, तब यह संघर्ष दिन प्रति दिन बढ़ता जा रहा है। 11 में से छह प्रत्याशी मुकाबले में हैं लेकिन आखिर में भाजपा, कांग्रेस, बसपा और निर्दलीय महेश शर्मा के बीच चतुष्कोणीय मुकाबला सिमट सकता है। ऐसे में इस सीट के प्रमुख भाजपा प्रत्याशी काबीना मंत्री बंशीधर भगत के बारे में कहा जा सकता है शेर अपनी मांद में घिर गया है। कालाढूंगी विस सीट के लिए पहली बार चुनाव हो रहा है। हल्द्वानी तथा पर्यटन नगरी नैनीताल-रामनगर के बीच होने के बावजूद विकास यहां कोसों दूर रहा है। उत्तराखंड बनने के बाद भी हालात में सुधार नहीं हुआ। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने कालाढूंगी को प्रदेश का पहला हाईटेक पालिटेक्निक बनाने तथा वर्तमान सरकार ने रोडवेज बस अड्डा, मिनी स्टेडियम व गैस गोदाम बनाने जैसे ख्वाब दिखाए थे लेकिन पूरे नहीं किए। राज्य बनने और उससे पूर्व से यह सीट नैनीताल सीट का हिस्सा रही है। बीते 21 वर्षो से नैनीताल में शामिल इस सीट पर कांग्रेस नहीं जीत पाई है। 1986 में चुनाव जीते किशन सिंह तड़ागी इस सीट से आखिरी कांग्रेसी विधायक रहे। 91 की रामलहर से लगातार तीन चुनाव भाजपा के वर्तमान काबीना मंत्री बंशीधर भगत यहां से जीते। 2002 में डा. नारायण सिंह जंतवाल उक्रांद के टिकट पर भाजपा से यह सीट झटकने में सफल रहे लेकिन गत 2007 के विस चुनाव में भाजपा के खड़क सिंह बोहरा ने पुन: यह सीट हासिल कर भाजपा का एक बार पुन: नैनीताल से परचम फहराया। अब भगत क्षेत्र से चौथी और जंतवाल दूसरी जीत की कोशिश में फिर मैदान में हैं। इस क्षेत्र की खासियत रही है कि यहां की जनता जीतने वाले प्रत्याशी को वोट देती आई है। यानी जो भी विधायक जीतता है, इस क्षेत्र में उसे बढ़त मिली होती हैं। इसी कारण नैनीताल के वर्तमान विधायक खड़क सिंह बोहरा और पूर्व विधायक डा. नारायण सिंह जंतवाल ने यहां से दावेदारी की थी। नई सीट होने, नैनीताल सीट के सुरक्षित घोषित हो जाने तथा हल्द्वानी सीट के शहर क्षेत्र में ही सीमित हो जाने के कारण भाजपा- कांग्रेस सहित उक्रांद में यहां एक से अधिक दावेदार टिकट हासिल करने को ऐड़ी चोटी का जोर लगा रहे थे। भाजपा से काबीना मंत्री बंशीधर भगत और कांग्रेस से राहुल गांधी के करीबी बताये जा रहे प्रकाश जोशी के मैदान में आने से यह सीट प्रदेश की वीआईपी सीटों में शुमार हो गई है। भगत क्षेत्र में अपने संपकरे, पार्टी के कैडर मतदाताओं तथा पिछले विस चुनाव के अलावा लोस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी की जीत के बावजूद भाजपा प्रत्याशी को मिली बढ़त तथा स्वयं की लगातार तीन जीतों के आधार पर यहां जीत का दावा कर रहे हैं, लेकिन पार्टी के अन्य दावेदारों क्षेत्रीय विधायक बोहरा व भाजयुमो के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गजराज बिष्ट की नाराजगी उनकी राह में बाधा बनी हुई है। दोनों दावेदारों ने क्षेत्र से चुनाव प्रचार करने से तौबा कर रखी है, ऐसे में वह भगत को नुकसान कितना पहुंचाएंगे, यह भगत की जीत-हार पर निर्भर करेगा। कांग्रेस से ‘पैराशूट प्रत्याशी’ बताये जा रहे प्रकाश जोशी की ऊर्जा स्वयं को स्थानीय साबित करने में लगी हुई है जबकि समर्थक उन्हें राहुल गांधी का नजदीकी होने का दावा कर क्षेत्र में विकास की गंगा बहा देने का ख्वाब दिखाकर जनता को अपने पक्ष में करने के प्रति आस्त हैं। कांग्रेस के बागी निर्दलीय उम्मीदवार जिला पंचायत अध्यक्ष कमलेश शर्मा के पति महेश शर्मा भगत के ही गृह क्षेत्र सर्वाधिक 65000 की जनसंख्या वाले ‘भाखड़ा वार’ में अच्छा दखल रखते हैं। उन्होंने क्षेत्र में बीते एक-दो वर्षो से अच्छी मेहनत की है, ऐसे में वह कांग्रेस प्रत्याशी के साथ ही भगत को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसी भाखड़ा वार क्षेत्र निवासी जिपं सदस्य भूपेंद्र सिंह उर्फ भाई जी भी निर्दलीय उम्मीदवार हैं। उनकी भी खासकर युवा वर्ग में काफी पैठ बताई जा रही है। इस क्षेत्र में रक्षा मोर्चा के सुरेंद्र निगल्टिया, निर्दलीय कांग्रेस से जुड़े वीर सिंह भी मैदान में हैं। दूसरी ओर 45000 की आबादी वाले ‘भाखड़ा पार’ क्षेत्र जिसमें कालाढूंगी नगर भी शामिल है, बाहरी-भीतरी का मुद्दा अधिक दिखाई दे रहा है। यहां बसपा प्रत्याशी दीवान सिंह बिष्ट सबसे पहले पार्टी प्रत्याशी घोषित होने, अनुसूचित वर्ग के करीब 20 हजार तथा क्षत्रिय समुदाय के सर्वाधिक 51 हजार से अधिक वोट होने व स्वयं अकेले दमदार क्षत्रिय प्रत्याशी होने के आधार के साथ मजबूत दिखते हैं। क्षेत्र में साढ़े तीन हजार मुस्लिम, छह हजार पंजाबी, साढ़े चार हजार वैश्य के अलावा 15 हजार ब्राह्मण भी प्रभावी भूमिका में हैं। कांग्रेस, भाजपा, उक्रांद प्रत्याशी और निर्दलीय महेश शर्मा आदि के भी ब्राrाण होने के कारण वह किसी एक के पक्ष में मतदान करेंगे कहा नहीं जा सकता। निर्दलीय जनार्दन पंत, तृणमूल कांग्रेस के फिदाउर्हमान, सपा के उमेश शर्मा भी मैदान में हैं।
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रविवार, 1 जनवरी 2012

क्या 'दशरथ' से मिला बनवास 21 वर्ष बाद तोड़ पायेगी कांग्रेस

1986 के बाद से एक अदद जीत को तरसता रहा है 'हांथ'
संभवतया यही कारण यशपाल को रोकता हो नैनीताल से चुनाव लड़ने से  पार्टी के बुजुर्ग कार्यकर्ता मानते हैं यशपाल ही तोड़ सकते हैं यह क्रम 
नवीन जोशी, नैनीताल। राजा दशरथ ने राम को  १२ वर्ष के बनवास पर भेजा था, लेकिन यहाँ नैनीताल में एक दशरथ ने कांग्रेस पार्टी को बनवास पर भेजा था, जिस से वह 21  वर्ष बाद भी वापस नहीं लौट पा रही है 1991 की राम लहर में रामलीला में 'दशरथ' का चरित्र निभाने वाले भाजपा के बंशीधर भगत ने कांग्रेस को जिस बनवास पर भेजा था, कांग्रेस के लिए उस से अभी भी वापस लौटना आसान नहीं लगता। शायद यही कारण हो कि अपनी परंपरागत सीट मुक्तेश्वर का काफी हिस्सा होने के बावजूद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य यहाँ से चुनाव लड़ने के अधिक इच्छुक नहीं दिख रहे, जबकि पार्टी के बुजुर्ग कार्यकर्ताओं का मानना है कि कांग्रेस की बनवास से वापसी इस बार कोई करा सकता है तो वह केवल यशपाल ही हो सकते हैं।
नैनीताल कुमाऊं मंडल की उन गिनी-चुनी सीटों में होगी, जिन्हें कांग्रेस पार्टी की परंपरागत सीट कहने से हर किसी को गुरेज होगा। अतीत से बात शुरू करें तो यूपी के दौर में लंबी-चौड़ी इस सीट पर वर्ष 1977 में राम दत्त जोशी जनता दल के टिकट पर विधायक रहे। अगले 82 के चुनावों में शिव नारायण नेगी ने यह सीट कांग्रेस की झोली में डालकर नफा-नुकसान बराबर करने की कोशिश की। 86 में साफ-स्वच्छ छवि के किशन सिंह तड़ागी ने कांग्रेस के लिये सीट बरकरार रखी, परंतु 91 की रामलर में भाजपा के ‘दशरथ’ बंशीधर गत ने कांग्रेस के शेर सिं नौलिया को पटखनी दी, और आगे अगले तीन चुनावों में वह यहाँ से जीत की हैट्रिक बनाते रहे। राज्य बनने के बाद वह इस सीट को छोड़कर हल्द्वानी चले गये, परिणामस्वरूप अपनी साफ-स्वच्छ छवि के बल पर डा. नारायण सिंह जंतवाल उक्रांद के टिकट पर भाजपा से यह सीट झटकने में सफल रहे, और कोंग्रेस का बनवास जारी रहा। गत 2007 के विस चुनावों में खड़क सिंह बोहरा ने पुनः यह सीट हांसिल कर भाजपा का एक बार पुनः नैनीताल से परचम फरा दिया। इसके साथ ही नैनीताल के लिये हांलिया वर्षों में यह माना जाने लगा है कि बुद्धिजीवियों के शहर के जाने वाले नैनीताल से चुनाव लड़ने के लिये पार्टी तथा प्रत्याशी दोनों की साफ-स्वच्छ छवि अधिक मायने रखती है। इस बात को भाजपा-कांग्रेस, उक्रांद सहित सभी पार्टियों के नेता भी स्वीकार करते हैं।  लेकिन जहाँ तक कांग्रेस के लिये 21 वर्ष के बनवास को तोड़ने का सवाल है, नगर के वरिष्ठतम कांग्रेसी किसन लाल साह ‘कोनी’, मोहन कांडपाल सहित अधिकांश कांग्रेसियों का भी मानना है कि यह मिथक तोड़ने में कांग्रेस केवल एक ही शर्त पर सफल हो सकती है, यदि यशपाल यहाँ से चुनाव लड़ें। अब पार्टी प्रदेश अध्यक्ष यशपाल पर है कि वह स्वयं फ्रंट पर आकर बल्लेबाजी कर अपनी टीम को लीड करते हैं या नहीं।

गुरुवार, 8 दिसंबर 2011

रिपोर्ट कार्ड नैनीताल विधानसभा क्षेत्र खड़क सिंह बोहरा: वायदों पर अमल क्यों नहीं हुआ बोहरा साहब!


नवीन जोशी, नैनीताल। खड़क सिंह बोहरा 55- नैनीताल विधानसभा सीट से भाजपा विधायक है। नये परिसीमन के बाद इस सीट का नाम 58- नैनीताल हो गया है। साथ ही सीट का भौगोलिक स्वरूप बदल गया है। नई 58- नैनीताल विधानसभा सीट में 145 बूथ शामिल है। इनमें बेतालघाट तहसील के 24 बूथ, कोश्यां कुटौली के 34 तथा नैनीताल के 87 बूथ शामिल है। पिछली 55-नैनीताल विस सीट में नैनीताल तहसील के 94 तथा कालाढूंगी के 17 कुल 111 बूथ थे। नैनीताल सीट सामान्य की जगह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। इस कारण श्री बोहरा के लिए इस सीट से चुनाव लड़ने के दरवाजे बंद हो गए है। नये परिसीमन की स्थिति साफ होने पर उन्होंने नैनीताल विधानसभा सीट का हिस्सा रहे कालाढूंगी से संभावनाएं तलाशनी शुरू कर दी है। इस कारण वह नैनीताल क्षेत्र की उपेक्षा करते रहे। ऐसा न केवल उन पर विपक्ष का आरोप है वरन वह स्वयं भी इसे स्वीकार करने से गुरेज नहीं करते। 
गत दिनों एक पोस्टर में वह स्वयं को चुनाव पूर्व ही नैनीताल के बजाय पहली बार अस्तित्व में आ रही कालाढूंगी सीट से विधायक दर्शा चुके है। बोहरा मूलत: कांग्रेसी है। वर्ष 2007 के चुनाव में उन्हें पहली बार भाजपा से टिकट मिला और वह विधानसभा पहुंचने में सफल रहे। तब उन्होंने जनता से खासकर माल रोड पर ग्रांड होटल के पास सेनैनी झील में सीवर की गंदगी न जाने देने, बलिया नाले को नगर का आधार बताकर उसका ट्रीटमेंट करने के वायदे किये थे लेकिन वह पांच साल में इन कामों की शुरुआत भी नहीं करा पाए। वायदों पर क्यों अमल नहीं हुआ? इस सवाल पर बोहरा बेबाक टिप्पणी करते है-उनका कहना है कि नैनीताल के सुरक्षित सीट घोषित हो जाने से उनको दुख हुआ। अपनी ओर से कोशिश की। नैनी झील में सीवर को जाने से रोकने के लिए कुछ कर नहीं सके पर कालाढूंगी व भवाली के साथ नगर के कृष्णापुर-हरिनगर क्षेत्र को सीवर लाइन से जोड़ने की पहल की। बलियानाले में आईआईटी रुड़की की टीम से सव्रेक्षण शुरू करा रहे है। बोहरा दावा करते है-उन्होंने हर गांव तक सड़क व भवाली में विधि विवि स्वीकृत कराया है। वह मानते है कि वन भूमि हस्तांतरण में अड़चन से कई सड़कों का निर्माण शुरू नहीं हो सका है। भीमताल में कुमाऊं विवि के तीसरे परिसर की सीएम से घोषणा कराई है। भाबर (कालाढूंगी) क्षेत्र में पेयजल व सिंचाई की समस्या का समाधान कराया है। उनका दावा है कि विधायक निधि की 100 फीसद धनराशि उन्होंने खर्च कर डाली है। विधायक बनने से पूर्व श्री बोहरा परिचितों से कड़क आवाज के साथ गर्मजोशी से मिला करते थे लेकिन विधायक बनने के बाद वह काफी समय अस्वस्थ रहे और जनता तो दूर परिचितों और पार्टी कार्यकर्ताओं से भी दूर रहे। स्वास्थ्य लाभ के उपरांत भी वह इस दूरी को पाट नहीं पाये। प्रदेश के सभी 70 विधायकों में बोहरा उन विधायकों में है जिन्होंने अपने कार्यकाल के पांचों वष्रो में अपनी विधायक निधि का शत- प्रतिशत हिस्सा खर्च किया है। यह भी सच है कि नैनीताल क्षेत्र में शिलापट उनकी निधि से विकास कार्य होने की गवाही नहीं देते। विरोधियों का आरोप है कि उनका ध्यान अपनी नई सीट कालाढूंगी की ओर अधिक रहा। विधायक बोहरा गत दिनों कालाढूंगी कांड के दोषियों की बात सीएम खंडूड़ी द्वारा न सुने जाने को लेकर तीखे तेवर भी दिखा चुके है। पार्टी के भीतर उनके विरोधियों के अनुसार बोहरा मूलत: कांग्रेसी है और उनके कांग्रेसी तेवर गाहे-बगाहे सामने आ जाते है। उन पर अपने नजदीकियों को विकास कार्यो के ठेके देने का आरोप भी लगते रहे है। प्रदेश की राजनीतिक उठापटक के बावजूद वह किसी गुट विशेष से नहीं जुड़े। एक पूर्व सीएम से उनकी नजदीकी बताई जाती है। इसके बाद भी उनको तटस्थ नेता कहा जाता है वह सभी से दोस्ताना ताल्लुकात रखते है। बोहरा की प्रस्तावित विधानसभा सीट कालाढूंगी में परिसीमन के बाद उनका अधिक समय इसी क्षेत्र में रहा है। पिछले चुनावों में उन्हें इस क्षेत्र से अच्छा जन समर्थन मिला था। वह स्वयं को इस क्षेत्र का निवासी होने का दावा भी करते है। बावजूद कालाढूंगी सीट का बड़ा हिस्सा हल्द्वानी के ग्रामीण क्षेत्रों से होने के कारण बोहरा के लिए यह सीट आसान नहीं कही जा सकती है।

चार दर्जन सवाल उठ पाये पांच साल में
नैनीताल के विधायक खड़क सिंह बोहरा पिछले पांच साल के दौरान विधानसभा में मौजूद तो रहे लेकिन उनके द्वारा क्षेत्र के विभिन्न मुद्दों से संबंधित कुल चार दर्जन सवाल ही उठाये जा सके। इस तरह विधानसभा में उनका प्रदर्शन औसत रहा। हालांकि सदन में उनसे अपेक्षा की जाती थी कि धारदार तरीके से क्षेत्र के मुद्दों को उठायेंगे लेकिन सत्तारूढ़ दल से जुड़े होने के कारण वे अपने मुद्दों को धार नहीं दे पाये।
बोहरा नहीं करा पाये धन का सदुपयोग : जंतवाल
नैनीताल सीट पर पिछले चुनाव में बोहरा के निकटतम प्रतिद्वंद्वी रहे उक्रांद के डा. नारायण सिंह जंतवाल का कहना है कि अफसरशाही पर उचित निगरानी न होने के कारण विधायक बोहरा विकास तथा दैवीय आपदा के कार्यो में मिले धन का सदुपयोग नहीं करा पाये। परिणामस्वरूप विस सीट में पूर्व के बड़े स्वीकृत कार्य भी नहीं हो पाये। पिछली सरकार के दौर में स्वीकृत नगर के रूसी गांव से बने और तल्लीताल में भवाली- हल्द्वानी रोड के बाईपास चालू नहीं हो पाये। नगर के सबसे पुराने सीआरएसटी स्कूल को पूर्व सरकार के दौर में मिले 90 लाख रुपये वापस चले गये। नगर में कोई नया बड़ा कार्य स्वीकृत नहीं हुआ।
विधायक बनने के बाद दुआ-सलाम भी नहीं
नगर के तल्लीताल चिड़ियाघर रोड निवासी रमेश तिवाड़ी के अनुसार विधायक बनने के बाद विधायक ने दुआ-सलाम भी कम कर दी, वहीं नगर के एक बुजुर्ग नागरिक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, विधायक ने उनके द्वारा बताया गया एक जनहित का कार्य तो बिना कोई प्रश्न किये तत्काल किया, लेकिन कुल मिलाकर उनका कार्यकाल निराशाजनक रहा। इतिहास में उनके कार्यकाल को किस कार्य के लिए याद किया जाएगा, ऐसा कोई कार्य याद नहीं आता।