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मंगलवार, 12 मई 2015

एक गृहणी से मृदुभाषिता के जरिए महिला कांग्रेस अध्यक्ष के पद तक पहुंची हैं सरिता आर्या


-परी कथा की तरह रहा है एक ग्रामीण बच्ची का महिला कांग्रेस के शीर्ष तक पहुंचने का सफर
नवीन जोशी, नैनीताल। नैनीताल की विधायक सरिता आर्या को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। मुख्यालय के निकटवर्ती गांव में अपनी माता के हाथों में पली एक बालिका का महिला कांग्रेस के शीर्ष पद पहुंचने का सफर किसी परी कथा की तरह रहा है, और इस कथा में सबसे बड़ी भूमिका सरिता आर्या के मृदुभाषी होने तथा पदों की प्राप्ति के बावजूद स्वयं के व्यवहार में कोई परिवर्तन खासकर किसी तरह का दंभ रखे बिना छोटों-बढ़ों सबको सम्मान देने की रही है। किसी भी व्यक्ति से हाथ जोड़कर कुशल क्षेम पूछना और कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि होने के बावजूद पीछे की पंक्ति में बैठे परिचितों का अभिनंदन करना जैसे उनकी पहचान बन गई है।
एक ग्रामीण बालिका से आईएएस अधिकारी की पत्नी तथा दो बेटों की मां के रूप में एक गृहणी के रूप में घर-गृहस्थी संभाल रही सरिता का सार्वजनिक जीवन में पदार्पण वर्ष १९९० में ऑल इंडिया वीमन कांफ्रेंस में जुड़ने के साथ हुआ। वर्ष २००३ में वह सीधे व पहले प्रयास में ही नैनीताल नगर पालिका अध्यक्ष की बड़ी भूमिका के लिए निर्वाचित हुर्इं और २००८ तक इस पद पर उनका बेदाग कार्यकाल रहा। आगे २००९ में ऑल इंडिया वीमन कांफ्रेंस ने उन्हें नगर अध्यक्ष की जिम्मेदारी सोंपी, जिसके जरिए अन्य दलों की महिला नेत्रियों के साथ भी उनके मधुर संबंध रहे। वर्ष २०१२ में एक बारगी सरिता को कांग्रेस पार्टी से टिकट प्राप्त करने के लिए पत्रकार वार्ता का सहारा लेना पड़ा था, जिसके बाद उनका टिकट फाइनल हुआ तो उन्होंने उक्रांद व भाजपा के हाथों रही नैनीताल सीट पर कांग्रेस को रिकार्ड २३ वर्षों के बाद सत्ता में वापस ला दिया। इधर राज्य की राजनीति में बदलते समीकरणों, जनपद के अन्य अनुसूचित जाति के नेता यशपाल आर्य के जनपद से बाहर से लड़ने से खाली हुई अनुसूचित नेता की जगह को बखूबी भरते हुए सरिता पहले मंत्री स्तरीय संसदीय सभा सचिव का पद प्राप्त करने के बाद महिला कांग्रेस के शीर्ष पर पहुंची हैं, जिस पर उनके दल के ही नहीं विरोधी दलों के लोग भी खुशी जता रहे हैं। उनके नजदीकी हांे या कि विरोधी, सबका मानना है कि उनका मृदुभाषी होना उनकी सबसे बड़ी ताकत है, जिसके बाद उनके मुस्कुराते चेहरे के आगे कोई विरोधी भी विरोधी नहीं रह पाता है। बुधवार को उनका मुख्यालय में स्वागत होने तथा आगामी १६ मई को पदभार संभाले जाने की संभावना है।

राजस्व मंत्री के क्षेत्र में राजस्व विभाग गायब !

-कुमाऊं मंडल के अपर आयुक्त की वार्षिक निरीक्षण आख्या में की गई है टिप्पणी-बाजपुर तहसील में राजस्व विभाग का कार्य किया जाना ही दृष्टिगोचर नहीं होता
नवीन जोशी, नैनीताल। कुमाऊं मंडल के अपर आयुक्त की वार्षिक निरीक्षण आख्या में बाजपुर तहसील के बारे में टिप्पणी की गई है कि बाजपुर तहसील के अंतर्गत राजस्व न्यायालय व राजस्व अभिलेखों को अद्यतन किए जाने तथा राजस्व संग्रह, जो कि राजस्व विभाग के मूलभूत कार्य हैं, के संबंध में राजस्व विभाग का कार्य किया जाना ही दृष्टिगोचर नहीं होता है। वहां सक्षम राजस्व अधिकारी यानी तहसीलदार राजस्व विभाग के मौलिक कार्यों को करने में कोई रुचि रखते हुए प्रतीत नहीं होते, एवं राजस्व विधियों का पालन जनहित में करने के बजाय उनका दुरुपयोग अधिनियमित एवं संवैधानिक व्यवस्थाओं के विपरीत किया जाना स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है। रिपोर्ट में बाजपुर तहसील के राजस्व विभाग पर अनेकों टिप्पणियां की गई हैं, तथा प्रभारी तहसीलदार को कदाचार का दोषी भी ठहराया गया है।
उल्लेखनीय है कि बाजपुर प्रदेश के राजस्व मंत्री यशपाल आर्य का विधान सभा क्षेत्र है। पूर्व में इस क्षेत्र में अवैध खनन के खिलाफ तत्कालीन नैनीताल रेंज के डीआईजी संजय गुंज्याल द्वारा कार्रवाई करने पर प्रदेश की चार में दो पुलिस रेंजों को ही समाप्त कर राज्य की पुलिस व्यस्था ही बदल दी गई थी। इधर अपर आयुक्त कुमाऊं जगदीश कांडपाल द्वारा बीती १५ मार्च को किए गए बाजपुर तहसील के वार्षिक निरीक्षण और इसकी एक अप्रैल को आयुक्त तथा ऊधमसिंह नगर जिले के डीएम एव एसडीएम आदि को भेजी गई रिपोर्ट 'राष्ट्रीय सहारा"  के हाथ लगी है। रिपोर्ट के बिंदु संख्या एक के अनुसार अपर आयुक्त को निरीक्षण के लिए प्रस्तुत की गई पुस्तिका राजस्व नियम संग्रह के अध्याय १८ के अनुसार नहीं थी, उसमें अनेक त्रुटियां तथा कई प्रपत्र संलग्न नहीं किए गए थे, इसके लिए प्रभारी तहसीलदार सुदेश चंद्र को साफ तौर पर कदाचार का दोषी ठहराया गया है। कहा गया है कि श्री चंद्र के द्वारा तहसील का आंतरिक निरीक्षण तथा संग्रह कार्य का पर्यवेक्षण भी नहीं किया गया है। अभिलेखों के अनुसार तहसीलदार न्यायालय में ८६ वाद विचाराधीन बताए गए, लेकिन चंद्र नहीं बताए गए कि कितरे वाद विवादित हैं। उनके द्वारा कभी भी वादों की सुनवाई नहीं की गई, व विचाराधीन वादों को नायब तहसीलदार से निस्तारित करवाया गया। विविध देवों के २६ मदों में २२२.७७ लाख की मांग के सापेक्ष फरवरी तक १८८.७८ लाख यानी ८४.७४ फीसद की वसूली दर्शाई गई, जबकि १० बड़े बकाएदारों से ही १०५ लाख की वसूली अवशेष पाई गई, यानी वास्तविक मांग करीब १५ करेाड़ को छिपा कर अधिक वसूली दिखाई गई। राजकीय देयों की भी करोड़ों रुपए की वसूली के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई। रिपोर्ट के अनुसार खतौनियों के रखरखाव व उनमें भूलेख नियमावली की प्रक्रिया का गंभीर उल्लंघन व क्षेत्राधिकार का अतिक्रमण बताया गया है, साथ ही आर-६ पंजिका में भी निर्धारित व्यवस्थाओं का अनुसरण नहीं किया गया है। इस बारे में ऊधमसिंह नगर के डीएम को कार्रवाई करनी थी। पूछे जाने पर डीएम पंकज पांडेय का कहना है कि प्रभारी तहसीलदार ने आगे से ऐसी कमियां न होने की बात कही है। अनुपालन रिपोर्ट कुमाऊं आयुक्त को एक-दो दिन पहले ही भेज दी गई है। मामला प्रदेश के राजस्व मंत्री के क्षेत्र से संबंधित होने के कारण अधिकारी मामले में कोई कार्रवाई करने या जवाब देने से भी बच रहे हैं।

योजनाबद्ध तरीके से भूमिहीन किया जा रहा एसटी के काश्तकारों को

नैनीताल। अपर आयुक्त की टिप्पणी रिपोर्ट के बिंदु संख्या १० में बाजपुर तहसील में अनुसूचित जनजाति के काश्तकारों की भूमि योजनाबद्ध तरीके से विक्रय कर उन्हें भूमिहीन किए जाने का अप्रत्यक्ष कार्य किया जा रहा है। इस कार्य के लिए पंजिका संख्या-४ को माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया गया है। मद संख्या १८५ व १९४ में क्रमश. १.७ लाख व १४.१ लाख रुपए की धनराशि एसटी के व्यक्ति की भूमि को बिना व्यापक प्रचार-प्रसार के तथा जमींदारी आकार पत्र ७३ (क) के तहत अनुमति लिए बिना ही नीलाम करने से प्राप्त हुई है। इसमें से ६.२८ लाख रुपए संबंधित काश्तकार गोविंद सिंह को नगद भुगतान दिया गया है, जो कि नियमविरुद्ध है।

मूलतः यहाँ देखें-राष्ट्रीय सहारा, देहरादून। १३ मई २०१५ , पेज-१।