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बुधवार, 28 सितंबर 2011

रयाल-नयाल के भरोसे जनरल की ’ससुराल‘



एक दर्जन पदों का कार्यभार संभाले हुए हैं दो अधिकारी
जिले में कई पद रिक्त, कुछ पदों पर अधिकारियों में होड़
कोई यहां आना नहीं चाहता, आता है तो जाना नहीं चाहता
नवीन जोशी, नैनीताल। सालभर बारिश, नैनी झील और तरुणाई से सरोवरनगरी में भले हर ओर हरीतिमा नजर आती हो मगर प्रशासनिक हलकों में इसे ‘शुष्क’ ही कहा जाएगा। जनरल खंडूड़ी के शासन में भी उनकी ‘ससुराल’ में दर्जनभर मुख्य विभाग केवल दो अधिकारियों ललित मोहन रयाल और अवनेंद्र सिंह नयाल के हाथों में हैं। राज्य में विगत दिनों बदले निजाम में हुए प्रशासनिक फेरबदल के बाद जिले में न हाकिम है और न मुख्य विकास अधिकारी। सीएम जनरल के ससुराल की अनूठी कहानी यह है कि कोई अधिकारी यहां आना नहीं चाहता, और जो एक बार यहाँ आ जाता है तो वापस जाना नहीं चाहता। 
नैनीताल मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी की ससुराल है। उनकी धर्मपत्नी अरुणा खंडूड़ी का बचपन यहीं बीता है। उनकी नगर की पाषाण देवी पर अगाध आस्था है। श्राद्ध पक्ष में जनरल ने तबादलों की पहली खेप का खुलासा किया तो सर्वाधिक फेरबदल इसी जनपद में हुए। उम्मीद थी कि नए अधिकारी शारदीय नवरात्र पक्ष में पद ग्रहण करेंगे। नवरात्र प्रारंभ हो गए हैं लेकिन अधिकारियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू नहीं हो पा रहा है। यहां से एक-एक कर अधिकारी चले तो गए पर नए आए नहीं। दर्जनभर विभाग केवल दो अधिकारियों के कंधों पर हैं। वर्तमान में जनपद के अपर जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के पास निर्वाचन जैसी पदेन जिम्मेदारियों के अतिरिक्त अपर आयुक्त कुमाऊं मंडल, सचिव झील विकास प्राधिकरण के साथ जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास आयुक्त का भी अतिरिक्त कार्यभार है। इसी तरह मुख्यालय में अपर निदेशक उत्तराखंड प्रशासन अकादमी के पद पर तैनात अवनेंद्र सिंह नयाल के पास पूर्व से ही श्रम आयुक्त, अपर राजस्व आयुक्त की जिम्मेदारियां थीं। उन्होंने अब कुमाऊं मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेशक पद की जिम्मेदारी भी संभाल ली है। इसके पीछे कारण बताया जा रहा है कि नैनीताल में अधिकांश अधिकारी आने से बचते हैं। इसके उलट कुछ विभागों में आने का अधिकारियों में बड़ा चाव है। यानी कुछ पदों का आकर्षण अन्य के मुकाबले हल्का पड़ जाता है। वहां एक अनार-सौ बीमार की स्थिति है। इसी तर्ज पर नैनीताल सीडीओ पद की ही बात करें तो जनपद में रहे पूर्व एडीएम धीराज सिंह गब्र्याल, उत्तराखंड प्रशासन अकादमी में अपर निदेशक रहे राजीव साह, हल्द्वानी में सिटी मजिस्ट्रेट रहे रणवीर सिंह चौहान, अपर आयुक्त और झील विकास प्राधिकरण के सचिव रहे एचसी सेमवाल आदि इस पद के प्रबल दावेदार बताए जा रहे हैं। जिलाधिकारी बन कर आ रहीं निधिमणि त्रिपाठी भी पूर्व में यहां सीडीओ रह चुकी हैं। इधर उनके नवरात्र शुरू होने के बाद भी कार्यभार ग्रहण न करने पर भी कयासों का दौर शुरू हो गया है।
इस आलेख को मूलतः यहाँ क्लिक कर राष्ट्रीय सहारा के प्रथम पेज पर भी देख सकते हैं.

रविवार, 4 सितंबर 2011

तंग कमरे में डाक्टर, शौचालय में दवाएं


यह है मंडल मुख्यालय के आयुष विंग का हाल मुख्यालय स्थित एक कक्ष में स्थापित आयुष विंग का नजारा।
नवीन जोशी नैनीताल। भवाली में जहां प्रदेश सरकार विपक्ष के तीव्र आक्रोश को झेलकर भी इमामी से प्रदेश का पहला आयुष ग्राम स्थापित करवाने को प्रतिबद्ध नजर आ रही है, वहीं मुख्यालय के बीडी पांडे जिला अस्पताल में महज 10 गुणा 15 वर्ग फीट के एक कमरे में आयुष विंग चलाया जा रहा है। महज चार कुर्सियों की जगह वाले आयुष विंग की कहानी भी अपने आप में अनूठी है। 
प्रदेश भर में चिकित्सकों की कमी के ‘दुखड़े’ के बीच यहां उपलब्ध चारों कुर्सियों में बैठने के लिए चार आयुर्वेदिक चिकित्सक तैनात हैं। जब चारों चिकित्सक उपलब्ध रहते हैं तो मरीजों को बैठने तो दूर, खड़े होने तक को जगह नहीं मिलती। जगह की कमी के कारण बहुमूल्य एवं साफ सुथरी जगह पर रखी जाने वाली दवाइयां शौचालय में रखी गई हैं। यहां तैनात चिकित्सक प्रसाधन के लिए भी इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं। इस कक्ष में बमुश्किल एक ही टेबल के गिर्द चार कुर्सियां लगी हुई हैं, जिन पर वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डा. अजय पाल सिंह चौधरी, चिकित्साधिकारी डा. शोभा पांडे, डा. प्रीति टोलिया एवं डा. ज्योत्सना कुनियाल (इन दिनों महानिदेशक के आदेशों पर हल्दूचौड़ में संबद्ध) तैनात हैं। यहां दवाइयां बांटने के लिए एक भी फार्मासिस्ट उपलब्ध नहीं है, जिस कारण दवाइयां बांटने का कार्य वार्ड ब्वाय के भरोसे है। कक्ष में दवाइयों की अलमारी रखने के लिए स्थान नहीं है, इसलिए आलमारी शौचालय में रखी गई है। मरीजों की बात करें तो इन चार चिकित्सकों की फौज की सेवाएं लेने यहां हर रोज औसतन 50 रोगी ही आते हैं, यानी हर चिकित्सक को दिन भर में औसतन एक दर्जन मरीज ही देखने होते हैं। बात यहीं खत्म नहीं होती। मुख्यालय में तीन अन्य आयरुवेदिक चिकित्सालय भी हैं। यहां भी चिकित्सक उपलब्ध हैं परंतु फार्मासिस्ट व सहायक स्टाफ नहीं। कहानी साफ है, चिकित्सकों ने सुविधा संपन्न मुख्यालय में तैनाती कराकर यहां भीड़ लगा दी है, लेकिन मरीजों को उनकी सेवाओं का लाभ नहीं मिल रहा। पूछने पर वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डा. चौहान ने बताया कि मुख्यालय में आयुष विंग का अलग चिकित्सालय बनाने के लिए तीन वर्ष से 10 लाख रुपये कार्यदायी संस्था उत्तराखंड पेयजल निगम का अवमुक्त भी हो चुके हैं, लेकिन जगह उपलब्ध नहीं कराई गई है। इधर सीएमओ के स्तर से रैमजे अस्पताल के पास की भूमि उपलब्ध कराई गई है, जिस पर निर्माण के लिए नक्शा झील विकास प्राधिकरण को स्वीकृति के लिए भेजा गया है।

शनिवार, 3 सितंबर 2011

लगातार समृद्ध हो रहा नंदा महोत्सव

अपनी पहचान कायम रखने में सफल रहा  108 सालों से हो रहा महोत्सव
नवीन जोशी, नैनीताल। सामान्यतया अतीत को समृद्ध परंपरा के लिए याद करने, वर्तमान को बुरा एवं भविष्य के प्रति चिंतित होने का चलन है लेकिन इस चलन को झुठलाता हुआ सरोवरनगरी का ऐतिहासिक नंदा महोत्सव साल दर साल नई परंपराओं को आत्मसात करता हुआ लगातार समृद्ध होता जा रहा है। पिछली शताब्दी और इधर तेजी से आ रहे सांस्कृतिक शून्यता की ओर जाते दौर में भी यह महोत्सव न केवल अपनी पहचान कायम रखने में सफल रहा है, वरन इसने सर्वधर्म समभाव की मिशाल भी पेश की है। पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी यह देता है और उत्तराखंड राज्य के कुमाऊं व गढ़वाल अंचलों को भी एकाकार करता है। इधर गत वर्ष अपनी वेबसाइट के जरिये ई-दुनिया में जाने के बाद इस वर्ष मां नंदा महोत्सव सोशल साइटों पर चर्चित हुआ है। सरोवरनगरी में नंदा महोत्सव की शुरुआत नगर के संस्थापकों में शुमार मोती राम शाह ने 1903 में अल्मोड़ा से यहां आकर की थी। शुरुआत में मंदिर समिति द्वारा ही यह आयोजन होता था, 1926 से आयोजन का जिम्मा नगर की सबसे पुरानी धार्मिक सामाजिक संस्था श्रीराम सेवक सभा को दे दिया गया, जो तभी से लगातार दो वि युद्धों के दौरान भी बिना रुके सफलता से और नए आयाम स्थापित करते हुए यह आयोजन कर रही है। कहा जाता है कि 1955-56 तक मूर्तियों का निर्माण चांदी से होता था, बाद में स्थानीय कलाकारों ने मूर्तियों को सजीव रूप देते हुए उसमें लगातार सुधार किया। परिणामस्वरूप नैनीताल की नंदा- सुनंदा की मूर्तियां, महाराष्ट्र के गणपति बप्पा जैसी ही जीवंत व सुंदर बनती हैं। खास बात यह भी कि मूर्तियों के निर्माण में पूरी तरह कदली वृक्ष के तने, पाती, कपड़ा, रुई व प्राकृतिक रंगों का ही प्रयोग किया जाता है। बीते तीन वर्षों से थर्मोकोल का सीमित प्रयोग भी बंद कर दिया गया है, जिसके बाद महोत्सव पूरी तरह ‘ईको फ्रेंडली’ हो गया है। साथ ही कदली वृक्षों के बदले 21 फलदार वृक्ष रोपने की परंपरा वर्ष 1998 से पर्यावरण मित्र वाईएस रावत के सुझाव पर शुरू की गई। वर्ष 2007 से तल्लीताल दर्शन घर पार्क से मां नंदा के साथ नैनी सरोवर की आरती की एक नई परंपरा भी जुड़ी है, जो प्रकृति से मेले के जुड़ाव का एक और आयाम है। मेला आयोजक संस्था ने मेले में परंपरागत होने वाली बलि प्रथा को अपनी ओर से सीमित करने की अनुकरणीय पहल भी की है। वर्ष 2005 से मेले में फोल्डर स्वरूप से स्मारिका छपने लगी, जिसका आकार इस वर्ष 220 पृष्ठों तक फैल चुका है। यहीं से प्रेरणा लेकर कुमाऊं के विभिन्न अंचलों में फैले मां नंदा के इस महापर्व ने देश के साथ विदेश में भी अपनी पहचान स्थापित कर ली है। शायद इसीलिए यहां का महोत्सव जहां प्रदेश के अन्य नगरों के लिए प्रेरणादायी साबित हुआ। बीते वर्ष से मेले की अपनी वेबसाइट के जरिऐ देश दुनिया तक सीधी पहुंच भी बन गई है। इधर फेशबुक, गूगल प्लस व ट्विटर सरीखी सोशल साइटों के जरिये भी मेला स्थानीय लोक कला के विविध आयामों, लोक गीतों, नृत्यों, संगीत की समृद्ध परंपरा का संवाहक बनने के साथ संरक्षण व विकास में भी योगदान दे रहा है।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हुई शुरूआत
नैनीताल (एसएनबी)। शक्तिस्वरूपा मां नंदा का 108वां महोत्सव सरोवरनगरी नैनीताल में पूरे धार्मिक उत्साह व परंपरागत तरीके से पूजा अर्चना एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ शुरू हो गया। मुख्य अतिथि डीएम शैलेश बगौली ने मां नंदा को शीश नवाते हुए उन्हें प्रदेश के दोनों अंचलों कुमाऊं व गढ़वाल को एक सूत्र में पिरोने वाली माता बताया। मल्लीताल रामलीला मैदान में आयोजित महोत्सव के शुभारंभ कार्यक्रम में डीएम श्री बगौली ने क्षेत्रीय विधायक खड़क सिंह बोहरा, पूर्व विधायक डा. नारायण सिंह जंतवाल, एसएसपी अनंत राम चौहान, केएमवीएन के एमडी चंद्रेश कुमार, आयोजक संस्था श्रीराम सेवक सभा के अध्यक्ष सुधीर जोशी व पालिकाध्यक्ष एवं सभा महासचिव मुकेश जोशी के साथ दीप प्रज्वलित कर 108वें नंदा महोत्सव का दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ तथा महोत्सव की रिकार्ड 220 पृष्ठों की वार्षिक स्मारिका का विमोचन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि मेला बीते कुछ वर्षो से लगातार समृद्ध होता जा रहा है तथा प्रदेश के बड़े महोत्सवों में शुमार हो गया है। उन्होंने महोत्सव के लिए जिला प्रशासन की ओर से हरसंभव सहयोग का आासन भी दिया। विधायक बोहरा ने मां नंदा को राज्य की कुलदेवी के साथ स्थानीय भूदेवी बताते हुए उनसे मां-बेटी का रिश्ता बताया। एसएसपी एआर चौहान ने मां से समृद्धि व शांति बनाये रखने की कामना की। पशु कल्याण बोर्ड की उपाध्यक्ष शांति मेहरा ने महोत्सव का स्वरूप लगातार बेहतर होने तथा पूर्व विधायक डा. जंतवाल ने बदलती तकनीकी के दौर में भी सांस्कृतिक थाती को आगे बढ़ाने की बात कही। इस दौरान परंपरागत तरीके से मूर्ति निर्माण हेतु प्रयुक्त होने वाले कदली वृक्षों के बदले रोपे जाने वाले 21 पौधों की पूजा अर्चना की गई तथा कदली वृक्ष लाने वाले दल को परंपरागत लाल एवं सफेद ध्वज (निशानों) पवित्र कदली वृक्ष लाने वाले दल को प्रदान किये। इस अवसर पर  सरस्वती शिशु मंदिर के बच्चों एवं भारत सरकार के गीत एवं नाटक प्रभाग के कलाकारों के कुमाऊं के परंपरागत रंग्वाली पिछौड़े पहनकर भजन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। छोलिया नर्तकों तथा गिरीश बोरा रीठागाड़ी ने लोक संस्कृति की झलक प्रस्तुत की। इस मौके पर पूर्व पालिकाध्यक्ष सरिता आर्या, संजय कुमार संजू, हेम आर्या, दया बिष्ट, दिनेश साह, किशन लाल साह कोनी, सभासद दीपक कुमार व मंजू रौतेला, सभा के जगदीश बवाड़ी, डा. अजय बिष्ट, कमलेश ढोंढियाल, अनूप शाही सहित बड़ी संख्या नगरवासी श्रद्धालु इन गौरवमयी पलों के गवाह बने। संचालन गंगा प्रसाद साह ने किया।


नंदा-सुनंदा के जयकारे के साथ शुरू हुआ जागर
बागेश्वर (एसएनबी)। कपकोट के पोथिंग गांव के भगवती मन्दिर में हर साल की तरह इस बार भी भव्य मेला लगा। हजारों श्रद्धालुओं ने मन्दिर में विधि विधान से पूजा अर्चना की और मनौतियां मांगी। परम्परानुसार कई श्रद्धालुओं ने मनौतियों के लिए बकरियों की बलि चढ़ाई और सुख शांति के लिए भगवती माता से प्रार्थना की। ग्रामसभा कपकोट में भी नंदा देवी महोत्सव वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य शुरू हो गया है। कपकोट के विभिन्न हिस्सों के अलावा जिले के अन्य क्षेत्रों से भी हजारों श्रद्धालुओं ने भागीदारी की। इस मौके पर आयोजित भंडारे में शिरकत कर प्रसाद भी ग्रहण किया। विधायक कपकोट शेर सिंह गड़िया, जिपं अध्यक्ष राम सिंह कोरंगा, उपाध्यक्ष विक्रम सिंह शाही के अलावा अन्य संगठनों के नेता, कार्यकर्ताओं ने भी भगवती मन्दिर जाकर पूजा अर्चना कर मनौतियां मांगीं। ग्रामसभा कपकोट में भी नंदा देवी महोत्सव वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य शुरू हो गया है। इसके अलावा कपकोट के ही बदियाकोट भगवती मन्दिर में शनिवार रात्रि जागरण व रविवार को मेला तथा भंडारे का आयोजन होगा। दोफाड़ के नंदादेवी मन्दिर में और पुड़कूनी के भगवती मन्दिर में रविवार से नंदादेवी मेला शुरू होगा। इसके अलावा रविवार को कोटभ्रामरी मन्दिर डंगोली में मेला लगेगा। सनेती के देवी मन्दिर में नौ व 10 सितम्बर को मेला लगेगा। कपकोट के केदारेर बगड़ में 28 सितम्बर से होने वाले दुर्गा पूजा महोत्सव की तैयारियां भी जोरशोर से शुरू हो गई हैं। महोत्सव के लिए देवीकुंड हिमालय से जल लाने के लिए गये 11 लोगों को विधायक कपकोट शेर सिंह गड़िया ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच यात्रा के लिए रवाना किया।
महावीर मंगल समूह बिलौना के तत्वावधान में बिलौना में चल रहे गणपति महोत्सव में दूसरे दिन भी श्रद्धालुओं की भीड़भाड़ रही। श्रद्धालुओं ने विधि विधान से पूजा अर्चना कर मनौतियां मांगी। 
अल्मोड़ा/रानीखेत (एसएनबी)। नंदा-सुनंदा के आह्वान जागर व गणेश पूजन के साथ अल्मोड़ा में नंदा देवी महोत्सव शुरू हो गया है। रानीखेत में कदली पेड़ को लाने के साथ मेले का शुभारंभ किया गया। अल्मोड़ा डय़ोरीपोखर में नंदा देवी गणोश पूजन में राज परिवार के युवराज नरेन्द्र चन्द्र सिंह ने भाग लिया। शनिवार को चौधरीखोला में कदली वृक्षों को निमंतण्रदिया जाएगा। महोत्सव के शुरू होते ही विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन भी शुरू हो गया है। नंदा देवी परिसर में हुई ऐपण प्रतियोगिता में दो दर्जन से अधिक युवतियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता प्रभा पांडे, मंजू पंत व मनोरमा बिष्ट के देखरेख में हुई। इधर रैमजे इंटर कालेज में उद्योग विभाग के तत्वावधान में हथकरघा प्रदर्शनी लगायी गई है। इसमें लगाए गए स्टालों में विभिन्न उद्यमियों द्वारा अपने उत्पादों की बिक्री प्रदर्शनी लगायी है। 
रानीखेत में कदली वृक्षों के आमंत्रण के साथ मेला शुरू हो गया है। शुक्रवार सुबह राय स्टेट से कदली वृक्ष को भव्य शोभायात्रा के साथ नगर भ्रमण कराकर मन्दिर में लाया गया। यहां शनिवार से मूर्ति निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी। इस अवसर पर कमेटी अध्यक्ष हरीश साह, विधायक करन महरा, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य सलाहकार परिषद अध्यक्ष अजय भट्ट, नरेन्द्र रौतेला समेत दर्जनों लोग मौजूद थे। राजा की भूमिका इस बार सामाजिक कार्यकर्ता मोहन नेगी निभा रहे हैं।

बागेश्वर में नंदा देवी महोत्सव कल 
बागेश्वर। श्री रामलीला कमेटी के तत्वावधान में रविवार से होने वाले नंदादेवी महोत्सव की तैयारियां जोरशोर से चल रही हैं। कमेटी के अध्यक्ष नंदन साह के नेतृत्व में दर्जनों पदाधिकारी, सदस्य और नगरीय युवा कदली वृक्ष लाने मंडलसेरा गांव रवाना हुए और पूर्व प्रधान किशन सिंह मलड़ा के खेत से वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच कदली वृक्ष निकाला गया। इसके बाद देवी की जय-जयकार के बीच कदली वृक्ष लेकर भक्तगणों ने नगर की सभी मुख्य सड़कों का परिक्रमण किया और महोत्सव स्थल रामलीला भवन नुमाईशखेत मैदान में वृक्ष रखा। इसके साथ ही देवी प्रतिमा बनाने का काम भी शुरू हो गया है। कदली वृक्ष लाने वालों में सूरज जोशी, नीरज उपाध्याय, नीरज पांडे, शंकर साह, पंकज पांडे, ललित तिवारी, किशन मलड़ा, रचित साह आदि दर्जनों युवा शामिल थे। महोत्सव की व्यापक तैयारियां चल रही हैं।
नैनीताल के विश्व प्रसिद्द नंदा महोत्सव की कुछ तस्वीरें यहाँ क्लिक करके देखी जा सकती हैं.
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